UPSC & PCS Daily Current Affairs: बजट 2026-27 के मुख्य बिंदु और आर्थिक सर्वेक्षण विश्लेषण

Daily Current Affairs (Special): बजट 2026-27 के मुख्य बिंदु एवं आर्थिक सर्वेक्षण विश्लेषण (UPSC & PCS Guide)

नवीनतम अपडेट: सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) और विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों (जैसे UPPCS, BPSC, MPPSC) के General Studies Papers (विशेषकर GS Paper 3 – Economy) के दृष्टिकोण से केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) और आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2025-26) सबसे महत्वपूर्ण पिलर्स में से एक हैं।

अगर आप इस साल या अगले वर्ष IAS या State PCS की परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, तो केवल आँकड़ों को रटना पर्याप्त नहीं होगा। आपको इसके पीछे के Macroeconomic Factors, नीतिगत बदलावों (Policy Shifts) और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का गहन विश्लेषण (In-depth Analysis) समझना होगा।

आइए, आसान भाषा में पॉइंट-टू-पॉइंट समझते हैं कि इस बार के बजट और इकोनॉमिक सर्वे में सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए क्या-क्या सबसे खास है।

1. आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey): भारतीय अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड

बजट पेश होने से ठीक पहले संसद में प्रस्तुत किया गया Economic Survey देश की आर्थिक सेहत का विस्तृत खाका पेश करता है। इस बार के सर्वे की थीम और मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

A. GDP Growth Rate और Real vs Nominal Analysis

  • Real GDP Growth: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर (Real GDP Growth) वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

  • Potential Growth: भारत की संभावित विकास दर (Potential Growth Rate) को लगभग 7% आंका गया है।

  • Key Drivers: इस ग्रोथ को मुख्य रूप से घरेलू मांग (Domestic Demand), मजबूत बैंकिंग सेक्टर (Strong Banking Sector Balance Sheet), और विनिर्माण (Manufacturing) तथा सेवाओं (Services) में लगातार सुधार से बल मिल रहा है।

B. मुद्रास्फीति और बाहरी क्षेत्र (Inflation & External Sector)

  • Inflation Control: खुदरा मुद्रास्फीति (Headline Inflation) नियंत्रित दायरे में रही है। खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) स्थिर बना हुआ है।

  • Forex Reserves: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) 700 बिलियन डॉलर से अधिक के मजबूत स्तर पर पहुँच गया है, जो लगभग 11 महीनों के आयात (Import Cover) के लिए पर्याप्त है।

  • Remittances: भारत दुनिया भर में प्रेषित धन (Remittances) प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है।

C. स्वदेशी और रणनीतिक लचीलापन (Strategic Resilience)

सर्वेक्षण में “Disciplined Swadeshi” और “Strategic Resilience” की अवधारणा पर जोर दिया गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण इनपुट्स के लिए विदेशी निर्भरता (Import Dependence) को कम करना और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में एक अनिवार्य हिस्सा बनाना है।

2. केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget): मुख्य बातें और विज़न

वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat@2047) के रोडमैप को आगे बढ़ाता है। इस वर्ष के बजट का मुख्य दर्शन ‘कर्तव्य पथ’ और उत्पादकता (Productivity Enhancement) पर आधारित है।

A. मुख्य राजकोषीय आँकड़े (Fiscal Indicators at a Glance)

UPSC/PCS के Prelims परीक्षा में अक्सर राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और व्यय के आँकड़ों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

सूचकांक (Indicator) बजट अनुमान 2026-27 (Budget Estimates)
कुल बजट आकार (Total Expenditure) ₹53.47 लाख करोड़ (लगभग)
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 4.3% (GDP का)
राजस्व घाटा (Revenue Deficit) 1.5% (GDP का)
कैपेक्स (Capital Expenditure – Capex) ₹12.2 लाख करोड़ (बढ़ाकर)
सांकेतिक जीडीपी वृद्धि (Nominal GDP Growth) 10.5%

UPSC Insight: बजट में राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के पथ पर बने रहते हुए राजकोषीय घाटे को FY26 के 4.4% से घटाकर FY27 में 4.3% पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य अपने कर्ज-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) को 50% के करीब लाना है।

3. बजट के प्रमुख तीन स्तंभ (The Three Kartavyas / Pillars)

बजट 2026-27 मुख्य रूप से तीन बड़े उद्देश्यों (Duties/Kartavyas) के इर्द-गिर्द बुना गया है:

1. आर्थिक विकास को गति देना (Accelerate & Sustain Economic Growth)

  • Capital Expenditure (Capex) पर जोर: बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के निर्माण के लिए बुनियादी ढाँचागत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। इससे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Crowding-in of Private Investment) को बढ़ावा मिलेगा।

  • Manufacturing & MSMEs: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाओं और रिस्क कैपिटल (Risk Capital) को सुगम बनाने के लिए Self-Reliant India Fund में अतिरिक्त फंड आवंटित किया गया है।

  • Clean Energy Transition: ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन corridors और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं।

2. आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण (Fulfill Aspirations & Build Capacity)

  • युवा शक्ति और कौशल विकास (Youth & Skilling): AI (Artificial Intelligence) और सेमीकंडक्टर (Semiconductor) जैसे एडवांस सेक्टर्स में युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centers of Excellence) की स्थापना।

  • शिक्षा व अनुसंधान (R&D): उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से दीप-टेक (Deep-Tech) स्टार्टअप्स को फंडिंग सपोर्ट प्रदान किया जाएगा।

3. सबका साथ, सबका विकास (Inclusive Growth & Social Sector)

  • ग्रामीण रोजगार योजना का पुनर्गठन: ‘विकसित भारत-ग्राम’ (VB-G RAM G) के तहत ग्रामीण रोजगार को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने के लिए बजट आवंटन में भारी वृद्धि की गई है।

  • हेल्थकेयर (Healthcare Sector): कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के इलाज से जुड़ी सामग्रियों पर कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। साथ ही एलाइड हेल्थ प्रोफेशन्स (Allied Health Professionals) के लिए नए संस्थान बनाए जाएंगे।

4. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रस्ताव (Tax Proposals)

कर प्रणाली (Taxation Regime) में इस बार अत्यधिक उथल-पुथल करने के बजाय स्थिरता (Tax Stability) और

सरलीकरण (Tax Simplification) पर बल दिया गया है:

A. प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes)

  • Income Tax Slabs: आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए टैक्स स्ट्रक्चर में निरंतरता बनी रहे।

  • New Income Tax Act: प्रत्यक्ष कर कानूनों को सुगम बनाने और कानूनी मुकदमों (Litigation) को कम करने के लिए सरलीकृत आयकर ढांचा लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।

  • Share Buybacks & STT: शेयर बायबैक से होने वाली आय को कैपिटल गेंस (Capital Gains) के रूप में टैक्स करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, वायदा एवं विकल्प (Futures & Options – F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में मामूली बढ़ोतरी की गई है ताकि अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लग सके।

B. अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes – Customs Duty Rationalization)

  • कस्टम ड्यूटी में छूट: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) और कैंसर दवाओं के आयात पर सीमा शुल्क घटाया गया है।

  • निर्यात को बढ़ावा (Export Competitiveness): चमड़ा (Leather), टेक्सटाइल (Textiles) और मरीन (Marine) उत्पादों के लिए इनपुट सामग्री के आयात पर शुल्क राहत बढ़ाई गई है ताकि घरेलू निर्यातक वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें।

5. सेक्टर-वार विश्लेषण (Sectoral Analysis for Mains)

A. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण (Agriculture & Food Processing)

  • Natural Farming: प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले 1 करोड़ किसानों को बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर्स (Bio-Input Resource Centres) के जरिए सपोर्ट दिया जाएगा।

  • Supply Chain Infra: कृषि उत्पादों के पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट (Post-Harvest Management) और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क को मजबूत करने पर बल।

B. इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कनेक्टिविटी (Infrastructure & Regional Connectivity)

  • हाई-स्पीड कॉरिडोर्स व रेलवे: पिछले कुछ वर्षों में हाई-स्पीड कॉरिडोर्स और रेल पटरियों के दोहरीकरण/विद्युतीकरण की गति को और तेज किया जा रहा है।

  • Coastal & Waterways Transport: तटीय माल ढुलाई (Coastal Shipping) और सेपलेन संचालन (Seaplane Operations) को बढ़ावा देने के लिए Viability Gap Funding (VGF) और विशेष प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई हैं।

C. MSME एवं विनिर्माण (MSME & Manufacturing)

  • Credit Guarantee: छोटे उद्योगों के लिए बिना कोलेटरल (Collateral-free Loans) के लोन सीमा को आसान बनाया गया है।

  • PLI Schemes: 14 प्रमुख सेक्टर्स में चल रही Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कर उनके आउटपुट को बढ़ाया जा रहा है।

6. मुख्य चुनौतियाँ और समालोचना (Critical Analysis for Answer Writing)

मेन्स परीक्षा (Mains Exam) में उत्तर लिखते समय आपको केवल सरकारी योजनाओं की प्रशंसा नहीं लिखनी होती, बल्कि उसका एक संतुलित आलोचनात्मक विश्लेषण (Balanced Critical Evaluation) भी देना होता है:

  1. निजी उपभोग (Private Consumption Limits): यद्यपि सरकार का ध्यान सप्लाई-साइड (Infrastructure/Capex) बढ़ाने पर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उपभोग की वृद्धि दर को और अधिक गति देने की आवश्यकता है।

  2. वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks): वैश्विक मोर्चे पर चल रहे तनाव, सप्लाई चेन में बाधाएँ और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit – CAD) पर दबाव डाल सकते हैं।

  3. रोजगार सृजन (Job Creation vs Automation): AI और ऑटोमेशन के दौर में केवल आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) ही काफी नहीं है, बल्कि जॉब-इंटेंसिव सेक्टर्स (जैसे टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन, एग्री-प्रोसेसिंग) में वास्तविक रोजगार पैदा करना एक बड़ी चुनौती है।

7. UPSC/PCS प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice MCQs)

प्रश्न 1: केंद्रीय बजट 2026-27 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जीडीपी का 4.3% लक्षित किया गया है।

  2. सरकार ने इस वर्ष आयकर स्लैब में व्यापक बदलाव किए हैं।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

    (A) केवल 1

    (B) केवल 2

    (C) 1 और 2 दोनों

    (D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (A)

व्याख्या: राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखा गया है। हालाँकि, प्रत्यक्ष करों या आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहें तो, बजट 2026-27 और आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत को केवल एक उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था (Consumption-led Economy) बनाने के बजाय एक मजबूत, आत्मनिर्भर और

विनिर्माण-संचालित (Manufacturing and High-Value Services) वैश्विक शक्ति बनाने का प्रयास करते हैं। सिविल सेवा अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि

वे इन आँकड़ों का उपयोग GS Paper-3 के उत्तरों में Case Studies, Data Points और Diagrams के रूप में करें।

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