G20 या BRICS सम्मेलन के मुख्य निर्णय और भारत का रुख

G20 या BRICS सम्मेलन के मुख्य निर्णय और भारत का रुख

G20 और BRICS सम्मेलन: प्रमुख वैश्विक निर्णय, आर्थिक रणनीति और भारत का रुख (Comprehensive Guide)

वर्तमान समय में बदलते हुए भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य, आर्थिक संकटों और बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था के निर्माण में G20 और BRICS जैसे संगठनों की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ये दोनों अंतर्राष्ट्रीय संगठन न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देने का काम करते हैं, बल्कि Global South की आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मुखरता से रखते हैं।

यह विस्तृत आर्टिकल हाल ही में आयोजित शिखर सम्मेलनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों, नीतिगत सुधारों तथा इस पर भारत के कूटनीतिक रुख (India’s Stance) का एक गहन विश्लेषण प्रदान करता है।

G20 और BRICS की प्रासंगिकता: एक संक्षिप्त परिचय (Overview)

  • G20 (Group of Twenty): यह विश्व की 20 प्रमुख विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) के लगभग 85% और वैश्विक व्यापार के 75% से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है।

  • BRICS: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ नए सदस्य देशों के विस्तार (BRICS Expansion) के बाद, यह समूह विश्व की कुल जनसंख्या और GDP (PPP आधार पर) का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, जो G7 अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक है।

G20 शिखर सम्मेलन: मुख्य निर्णय एवं महत्वपूर्ण निष्कर्ष (Key Outcomes)

हालिया G20 शिखर सम्मेलन (Johannesburg Summit) में अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल अवसंरचना जैसे कई वैश्विक मुद्दों पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किए:

1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग:

सम्मेलन के नेताओं की घोषणा (Leaders’ Declaration) में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान वैश्विक शासन संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसलिए, United Nations Security Council (UNSC) में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर सहमति बनी।

2. क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क (Critical Minerals Framework):

ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को गति देने के लिए आवश्यक खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की सप्लाई चेन को पारदर्शी और मजबूत बनाने हेतु G20 Critical Minerals Framework को अपनाया गया।

3. जलवायु वित्त और ‘Billions to Trillions’ का लक्ष्य:

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों ने संकल्प लिया कि ग्रीन फाइनेंसिंग (Green Financing) को ‘बिलियंस से ट्रिलियंस’ डॉलर के स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि विकासशील देश नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को आसानी से अपना सकें।

4. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और Responsible AI:

भारत के सफल Digital Public Infrastructure (DPI) मॉडल को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के सुरक्षित, नैतिक और उत्तरदायी उपयोग पर सामूहिक नियम बनाने पर बल दिया गया।

BRICS शिखर सम्मेलन: मुख्य निर्णय और रणनीतिक पहल (Major Initiatives)

BRICS सम्मेलनों का मुख्य ध्यान Multipolar World Order की स्थापना करने और वैश्विक वित्तीय संस्थानों की निर्भरता को कम करने पर केंद्रित रहा है। इसके प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

1. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (Local Currency Settlement):

BRICS देशों ने अमेरिकी डॉलर (US Dollar) पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) के उपयोग को बढ़ावा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

2. BRICS Central Bank Digital Currency (CBDC):

वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के डिजिटल सिक्कों (CBDCs) को आपस में जोड़ने और एक सुरक्षित अंतर-सीमा भुगतान प्रणाली (Cross-Border Payment System) विकसित करने पर चर्चा हुई।

3. आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन (Supply Chain Resilience):

सेमीकंडक्टर, दवाओं (Pharmaceuticals) और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सप्लाई चेन व्यवधानों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर काम करने का फैसला किया गया।

इन सम्मेलनों पर भारत का रुख और नेतृत्व (India’s Stance & Vision)

भारत ने इन दोनों प्रमुख मंचों पर “Humanity First” (मानवता सर्वप्रथम) और “Vasudhaiva Kutumbakam” (एक पृथ्वी, एक कुटुंब, एक भविष्य) का दृष्टिकोण रखा है:

1. ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज (Voice of Global South):

भारत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैश्विक ढांचा तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि विकासशील देशों और अफ्रीकी संघ (African Union) जैसी संस्थाओं की चिंताओं को मुख्यधारा में शामिल न किया जाए।

2. जलवायु न्याय (Climate Justice) और नैतिक जिम्मेदारी:

जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए भारत ने Climate Justice की मांग की। भारत का रुख है कि विकसित देशों को उनके ऐतिहासिक उत्सर्जन (Historical Emissions) की जिम्मेदारी लेते हुए विकासशील देशों को सस्ती तकनीक (Technology Transfer) और फंड मुहैया कराना चाहिए।

3. गुटबाज़ी से दूरी और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy):

BRICS के मंच पर भारत ने हमेशा एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। भारत का लक्ष्य BRICS को “पश्चिम-विरोधी” (Anti-West) ब्लॉक बनाने के बजाय “गैर-पश्चिमी” (Non-West) मंच के रूप में विकसित करना है, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे।

4. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance on Terrorism):

भारत ने G20 और BRICS दोनों घोषणा-पत्रों में सभी प्रकार के आतंकवाद और उसकी फंडिंग का कड़ा विरोध करते हुए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता जताई है।

G20 बनाम BRICS: एक विश्लेषणात्मक तुलना (Comparative Analysis)

पैरामीटर (Parameter) G20 (Group of 20) BRICS
मूल प्रकृति (Core Nature) विकसित एवं विकासशील देशों का मिश्रित मंच मुख्यतः उभरती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन
प्राथमिक एजेंडा (Primary Agenda) वैश्विक आर्थिक स्थिरता, जलवायु, DPI बहुध्रुवीयता, वित्तीय सुधार, लोकल करेंसी ट्रेड
भारत की भूमिका (India’s Role) ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच पुल (Bridge) संतुलनकर्ता (Balancing Power) और नेतृत्वकर्ता

निष्कर्ष (Conclusion)

G20 और BRICS दोनों ही वैश्विक शासन प्रणाली (Global Governance System) को नया आकार दे रहे हैं। जहाँ G20 आर्थिक विकास और वैश्विक चुनौतियों पर सर्वसम्मति बनाने का बड़ा मंच है, वहीं BRICS वैश्विक वित्तीय ढांचे को अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत का प्रगतिशील, जन-केंद्रित और “Humanity First” दृष्टिकोण इन दोनों सम्मेलनों में एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति (Responsible Global Power) के रूप में उसकी स्थिति को और मजबूत करता है।

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